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नये धर्मों का उदय


नये धर्मों का उदय: 


 **पृष्ठभूमि**


۞    ई.पू. छठी शताब्दी का काल भारतीय इतिहास में धार्मिक आन्दोलन का काल माना जाता है। गंगा के मैदानों के मध्य में अनेक धार्मिक सम्प्रदायों का उदय हुआ जिनमें करीब 62 धार्मिक सम्प्रदाय ज्ञात है। इनमें बौ) और जेन सम्प्रदाय सबसे महत्व के थे और इन दोनों का उदय सामाजिक-धार्मिक सुधार क परम शक्तिशाली आन्दोलन के क्रम में हुआ। 

۞    इनके उद्भव का सबसे महत्वपूर्ण कारण था र्न कृषि मूलक अर्थवयवस्था का उदय जो लोहे के प्रया के कारण संभव हुआ। इसके अतिरिकत् ब्राह्मणों की सर्वोच्चता के खिलाफ क्षत्रियों की प्रतिक्रिया, वैश्यों की अपनी सामाजिक स्थिति सुधारने की चाह, पशुपालन की आवश्यकता, नगरीकरण के कारण नवीन परिस्थितियों का जन्म तथा आम जनों के सरल जीवन पद्धति की ओर लौटने की चाह के कारण धार्मिक आंदोलन का उद्भव हुआ।

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