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मौत की महारानी

 इतिहास की गहराइयों से निकली दास्तानें

मौत की महारानी

आपकी इतिहास की कक्षा में यह कहानी नहीं पढ़ाई जाएगी। भारत की महान नारियों में इस बहादुर महिला का ज़िक्र भी आप ने शायद ही कभी सुना होगा।

पर यह महान स्त्री महिला सशक्तिकरण के प्रत्येक आंदोलन के लिए एक आदर्श प्रतिमान है। भारत के महान लोगों की किताब में जिनका ज़िक्र पहले अध्याय में ही होना चाहिए, वो हैं - गुजरात की महारानी नायकी देवी।

तारीख : सन ११७८ ईस्वी के आसपास

स्थान : माउंट आबू के निकट

 

पृष्ठभूमि

मुहम्मद गोरी एक आक्रमणकारी के रूप में जाना जाता है जिसने पृथ्वीराज चौहान को हराकर भारत में सन ११९२ में जिहादी राज्य की स्थापना की थी। उसके बारे में दो बातें लोग नहीं जानते - वो ये कि उसको खून बहाने का और सेक्स का नशा था। सेक्स की अधिकता की वजह से वो नपुंसक हो गया था। शायद वो पैदायशी नपुंसक था या नायकी देवी की तलवार ने उसको नपुंसक बनाया इसके बारे में जानकारी नहीं है। हमें सिर्फ यह पता है कि वो किसी को भी नहीं छोड़ता था- औरत, मर्द या बच्चे, किसी को भी नहीं। बाद में उसने अपने सेक्स गुलामों में से ही अपना उत्तराधिकारी

चुना। उसके सारे युद्धों के पश्चात बड़े पैमाने पर बलात्कार होते थे। बुजुर्ग औरतों और मर्दो की हत्या करके जवान औरतों और बच्चों कोयौन गुलाम' (सेक्स स्लेव) बना लिया जाता था।

इस्लाम के पहले खलीफ़ा के राज्य स्थापना के साथ ही भारत जिहादी हमलों का प्रमुख केंद्र बन गया इसका कारण यह था कि इस्लामी मतानुसार हिन्दू मूर्तिपूजा करने के कारण दुनिया के सबसे गंदे प्राणी माने गए हैं। इन जिहादियों को हिन्दू औरतों, बच्चों और मर्दो के साथकुछ भी करने काखुदाई अधिकार प्राप्त है ताकि वो इस्लाम के स्वच्छता मिशन के अनुसार पूरी दुनिया से सारे गैर-इस्लामी धर्मों का वजूद मिटा सकें।

मुहम्मद गोरी ने मुल्तान (अब पाकिस्तानी पंजाब में) को जीत लिया था। अब उसका अगला कदम भारत में गुजरात के रास्ते हमला करना था। उसने गुजरात की खूबसूरत महारानी नायकी देवी के बारे में बहुत सुन रखा था। जो कि अपने दुधमुंहे बच्चे भीमदेव सोलंकी की तरफ से अपने समृद्ध और शक्तिशाली राज्य गुजरात पर राज करती थीं।

वो अपनी बरबादी की पुकार को अनसुना नहीं कर सका। उसने गुजरात की राजधानी अन्हिलवाड़ा की तरफ विशाल सेना के साथ कूच किया। महारानी नायकी देवी ने पृथ्वीराज चौहान सहित सभी राजाओं को एक करने का असफल प्रयास किया परन्तु जैसा कि हम आजकल भी देखते हैं हिंदू राजाओं ने कहाहम क्यों इस लड़ाई में पड़ें?” मात्र नर्व्हल के राय ने हाथियों का एक दस्ता भेजा था मदद के लिए।

रानी को आने वाली मुसीबत का अंदाजा था। जितनी भी फ़ौज इकट्ठी हो सकती थी उसने की ताकि उन बलात्कारियों और हत्यारों की सेना को अपनी राजधानी से जितनी दूर हो सके रोक दें और यदि वे लोग हार भी जाएं तब भी राजधानी में स्त्रियों को इतना समय मिल सके कि वो कहीं भाग जाएं या जौहर कर लें बजाए इसके कि हमलावरों के हाथों उनकी अस्मत लूटी जाए।

दोनों सेनाओं का आमना-सामना कयादरा में हुआ - राजधानी से चालीस मील दूर।

 

स्थिति

गोरी ने अपना दूत भेजा -रानी और उसके बच्चे को हमारे हवाले कर दो और अपनी औरतें और सोना, जवाहरात हमको सौंप दो। हम तुम्हें छोड़ देंगे।

महारानी इससे विचलित नहीं हुईं। वह मुस्कुराई अपने राजकुमार को गोद में बांधा

और घोड़े पर बैठ गईं। दूत से कहा कि वो गोरी को जाकर बता दे कि उसकी मांगे मंजूर हैं लेकिन रानी पहले 'द्वारकाधीश' (भगवान कृष्ण) की पूजा करेंगी। नायकी देवी ने अपनी आंखें बंद की और कुछ समय के लिए शांत होकर प्रार्थना की और फ़िर एक गर्जना की -जय द्वारकाधीश

इसी बीच वो दूत गोरी के पास पहुंच गया था और उसको 'खुशखबरी दे दी गई थी। इतनी आसान जीत की खबर से गोरी की बांछे खिल गईं। वह रानी और उसके दुधमुंहे बच्चे को लेकर तरह-तरह के दिवा स्वप्न देखने लगा। अपनी गंदी सोच के साथ उनके ख्यालों में डबने लगा। वो सोलंकी सेनाओं के शिविरों की तरफ देखता है, कोई घोड़े पर सवार होकर आ रहा है। जैसे-जैसे धूल की परत नीचे बैठती है, घुड़सवार और करीब आ जाता है। वो देख सकता है - एक खूबसूरत स्त्री, गोद में बंधा हुआ एक नन्हा बालक, घोड़े के टापों की आवाज के साथ गोरी की धड़कने बढ़ती चली जाती हैं। वो अपने शरीर में फैलती हुई सनसनी महसूस कर रहा है। उसका दिमाग सुन्न होता जा रहा है। वो ज़ोर-ज़ोर से हांफने लगता है। उसकी आवाज फंसने लगती है। उसने ऐसी खूबसूरती का वर्णन सिर्फ जन्नत की हूरों के बारे में ही पढ़ा था।

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फिर क्या हुआ

रानी रुकती हैं । गोरी को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे अचानक से एक शोर उठता है, जो और तेज़ होता जाता है। इसके पहले कि वो कुछ समझ पाता उसने देखा कि रानी के पीछे से घोड़े और हाथियों के दस्ते उसके खेमे की तरफ दौड़े चले आ रहे हैं और वो दस्ते उस रेगिस्तान में चारों तरफ फ़ैल गए।

जब तक गोरी के सिर से वासना का भूत उतरता उसका खेमा तीन तरफ से घेरा जा चुका था।हिन्दू इतने तेज कैसे हो सकते हैं?”, “ये क्या हुआ?”, “पैगंबर ने तो कहा था कि एक मुसलमान दस काफिरों पर भारी पड़ता है। मुझे तो लगता है कि मैं जन्नत की हूरों से भी अधिक सुंदर औरत को पाने का हकदार हूं परन्तु उसको पाने से पहले ही अल्लाह उसे मुझसे कैसे छीन सकता है?” अब उसके पास सोचने का वक़्त नहीं था कि अचानक से क्या हुआ? वो तुरंत घोड़े पर बैठा और अपने खेमे में पीछे की तरफ भागा।

गुजरात के बहादुर राजपूतों ने एक के बाद एक सुअर को काटना शुरू कर दिया। उन्होंने बता दिया था कि उनकी धरती शेरों की धरती क्यों कहलाती है ! उस समय गोरी केवल एक ही बात सोच सकता था - अपनी जान बचाकर भागना।

 


और फिर

रानी के दोनों हाथों में तलवारें चमकने लगती हैं और रानी लगातार सिरों और हाथों को काटते हुए गोरी की तरफ दौड़ती हैं। गोरी ने एक झलक रानी की तरफ देखा - सुंदरता की देवी अबमौत की देवी' बन गई थी। गोरी भागा और तेजी से भागा। अब रानी ने एक तलवार फेंक दी तथा और शक्ति लगाते हुए घोड़े की बाग़ डोर को संभाला और अपनी गति तेज की। गोरी की तरफ आगे बढ़ते हुए उन्होंने कई सुअरों को काटा।

अंत में वे नज़दीक पहुंच ही गईं - उन्होंने पूरी ताकत से तलवार का एक वार किया लेकिन ज़रा सी चूक हो गई क्योंकि एक शत्रु ने पीछे से उन पर हमला कर दिया था और यह जरा सी चूक ही इतिहास की सबसे महंगी चूक साबित हुई।

नायकी देवी की तलवार ने उस हमलावर को तुरंत जन्नत भेज दिया लेकिन गोरी बच गया। उसकी गर्दन कटने की बजाए रानी की तलवार ने उसका पिछवाड़ा काट दिया था।

(लगभग यही घटना १२५ साल बाद फ़िर से दुहराई गई जब गोरा ने ख़िलजी का पिछवाड़ा काटा था।)

इससे पहले कि रानी दुबारा हमला कर पातीं - उनको और ज्यादा सुअरों ने घेर लिया और गोरी की जान बच गई।

 

परिणाम

गोरी और उसके लुटेरों की सेना को बुरी तरह परास्त कर खदेड़ दिया गया। गोरी तो इतना भयभीत हो गया कि वो घोड़े पर से उतरा ही नहीं। उसके पिछवाड़े से खून रिसता रहा लेकिन कुछ दिन बाद मुल्तान पहुंचने के बाद ही वो घोड़े से उतरा। उसने अपने सिपाहियों से कह दिया था कि चाहे वो सो जाए या उसका इलाज हो रहा हो, उसका घोडा रुकना नहीं चाहिए और अगर एक घोडा दौड़ना बंद कर दे तो उसको दूसरे घोड़े पर बिठा दिया जाए। जब वो मुल्तान पंहुचा पूरी तरह से खून और टट्टी-पेशाब से सना हुआ था। उसको पता चल गया था कि उसके अगले और पिछले कई अंग हमेशा के लिए बरबाद हो चुके हैं।

गोरी ने गुजरात पर हमला करने की दुबारा जुर्रत नहीं की। उसने अगले १३ साल तक भारत पर हमला करने की सोची भी नहीं। यदि पृथ्वीराज चौहान ने नायकीदेवी की मदद की होती तो आज हम भारत का एक दूसरा इतिहास पढ़ रहे होते। अगले १२० सालों तक किसी आतंकवादी ने गुजरात पर हमला करने की जुर्रत नहीं की।

 

गोरी की बरबादी

गोरी की मानसिक और शारीरिक दोनों ही काम प्रवृत्तियां हमेशा के लिए समाप्त हो गईं। उसका घायल पिछवाड़ा उसको एक राजपूतानी की तलवार की जिंदगी भर याद दिलाता रहा। क्योंकि वो अब अपने पुरुष साथियों के साथ समलैंगिक प्रेमालाप नहीं कर पा रहा था। अब वो खिलाड़ी नहीं बल्कि मात्र एक मूक दर्शक भर रह गया था। वो युद्ध करने के काबिल नहीं रहा और अपने पुरुष दासों पर निर्भर रह गया, वो बच्चे नहीं पैदा कर सकता था और उसको अपना राज्य अपने सेक्स गुलामों के बीच बांटना पड़ा ताकि वो अपनी जान बचा सके।

 

इस्लामिक राज्य का मिथक

नायकी देवी जैसी महान वीरांगनाओं की बहादुरी से यह साबित होता है कि भारत में कभी भी इस्लामी हुकूमत स्थिर नहीं रही। हमेशा उनके साथ युद्ध होता रहा। मुहम्मद बिन कासिम से लेकर औरंगज़ेब तक के राज्य के जो ऐतिहासिक नक्शे दिखाए जाते हैं, वो सब फर्जी हैं।

इन आक्रमणकारियों के साथ हमेशा एक प्रतिरोध बना रहा और अंत में मुग़ल राज्य का सम्पूर्ण अंत हो गया और आज बहुत से मुग़ल खानदान के शाही वारिस रेलवे स्टेशन पर भीख मांगते हुए मिल जाते हैं - जिनके हाथ में एक पेंटिंग होती है - अपने बाप-दादाओं की तस्वीर, जिसपर लिखा होता हैलाल किला हमारा है।"

 

अगला कदम

यह कहानी आप अपने बच्चों को सुनाएं, अपनी बेटियों को सुनाएं, वे किसी के गुलाम नहीं बनेंगे।

वे नायकी देवी जैसे बहादुर बनेंगे और देश के प्रत्येक कोने में वन्देमातरम् अर्थात् 'राष्ट्र और स्त्रियों का एक मां के रूप में सम्मान' के युग का पुनरुत्थान करेंगे।

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